Thursday, 13 October 2016

इसलिए बंद होनी चाहिए पाकिस्‍तानी कलाकारों की भारत में एंट्री..!

भारत-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव और पाकिस्तान की बार-बार की जा रही नापाक हरकतों के असर अब देश के आम नागरिकों पर भी होने लगा है। इस तनाव के बीच पाकिस्तानी कलाकारों के हमारे देश में काम करने का भी मुद्दा ज़ोर-शोर से उठा, इस मामले में कुछ लोगों कहना है कि संगीत, कला और कलाकार को सीमाओं में नहीं बांधना चाहिए।
दरअसल, कुछ लोगों को दोनों देश के बीच युद्ध जैसे हालात में भी पाकिस्तानी कलाकारों का बॉलीवुड में काम करना ग़लत नहीं लगता, तो वहीं एक धड़ा ऐसे गंभीर हालात में उनके देश में काम करने के खिलाफ़ है। उनका कहना है कि इन हालात में दुश्मन देश के कलाकारों को हम अपने देश में काम करने की इज़ाज़त कैसे दे सकते हैं।
क्या आपको ये अजीब नहीं लगता कि एक तरफ़ हमारी सेना देश की रक्षा के लिए जान गंवा रही है, और दूसरी तरफ़ हम उसी दुश्मन देश के कलाकार को वीआइफ ट्रीटमेंट दें, वो हमारे देश के पैसे कमा कर जाएं और अपने देश, जो आजतक आतंकियों का पनाहगार बना है, को पैसे दें।
पाकिस्तानी कलाकारों के हिमायती कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनका कहना है कि उन कलाकारों की हमसे क्या दुश्मनी है, वो आतंकी थोड़े ही हैं। हम उनसे क्यों दुश्मनी निभाएं। कलाकार को इन सबसे अलग रखना चाहिए।
दरअसल, यह बेहद अच्छी बात है, कलाकार को अलग रखिए, खेल को अलग रखिए, यकीनन यदि ऐसा ही है, तो क्या देश की सेना ने कोई गुनाह किया है या उन्हें शौक़ चढ़ा है अपना घर-परिवार, सुख-चैन छोड़कर बिना अपनी जान की परवाह किए माइनस ज़ीरो डिग्री तापमान में चौबीसों घंटे प्रहरी बनकर देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं ताकि हम सब अपने घरों में सुरक्षित रह सकें। यदि सेना भी यह कह दे कि भई हमारी पाकिस्तानी सेना से थोड़े ही दुश्मनी हैं, हम भी उनसे जाकर हाथ मिला लेते हैं। उनकी सेना तो आतंकी नहीं है न, फिर क्या होगा, क्या आप इसी तरह अमन-चैन से अपने घरों में रह पाएंगे?
ये बात सही है कि कलाकार या खिलाड़ी आतंकी नहीं है, मगर इनका ताल्लुक जिस देश है वो हमेशा से आतंकियों का पनाहगार रहा है, और आए दिन हमारे देश में अशांति फैलाता रहता है। ऐसे में नैतिकता के नाते हमें उनसे रिश्ता नहीं रखना चाहिए। हाल ही में नाना पाटेकर ने कहा था कि देशहित सबसे पहले आता है और ये बात हर नागरिक को समझनी चाहिए। अपने घर/ऑफिस के एसी कमरों में बैठकर किसी तरह का कमेंट पास करना बहुत आसान होता है।
पाकिस्तानी कलाकारों की वकालत करने वालों से पूछा जाना चाहिए कि क्या आपको इस बात का ज़रा भी एहसास है कि जो सैनिक सीमा पर दिन-रात चौकसी करता है, उसके और उसके परिवार की ज़िंदगी कितनी मुश्किल होती है। गोलियों के बीच उसका हर दिन गुज़रता है, उसे तो ये भी पता नहीं होता कि वो अगले दिन का सूरज वो देख पाएगा या नहीं।
इधर, दूसरी तरफ़ उसके माता-पिता, पत्नी-बच्चे और रिश्तेदार हर दिन उसकी ज़िंदगी की दुआ मांगते हैं। मैं ख़ुद एक डिफेंस बैकग्राउंड से हूं और कारगिल वॉर के व़क्त मेरे पिता भी जम्मू-कश्मीर में ही तैनात थे, जितने दिनों तक लड़ाई चली हम हर रोज़ एक डर के साये में जिए, हर पर नज़रें टीवी पर गड़ी रहती थी। कई-कई दिनों तक फोन पर बात नहीं हो पाती, तो दिल किसी अनहोनी की आशंका से सहम उठता था। उस दर्द, डर और मुश्किल हालात का अंदाज़ा एक सैनिक के परिवार को ही हो सकता है किसी और को नहीं। जिस देश ने हमारी जन्नत को जहन्नुम बना दिया है, उससे किसी तरह का रिश्ता रखना मुनासिब नहीं है। यदि हम ऐसा करते हैं, तो ये हमारे देश, सेना, सैनिकों की शहादत और उनके परिवार की तौहीन है।
ज़रा उन सैनिकों के बारे में सोचिए जो ये सोचकर सीमा पर गोली खाने को तैयार खड़े रहते हैं कि पीछे से देश/समाज है, उनके परिवार की देखभाल के लिए, उन्हें ये सुनकर कैसा लगेगा कि उसके ही देश के कुछ लोग पाकिस्तान से दोस्ती की बात करते हैं। वैसे किसी ने सच ही कहा है दूसरों को सीख/सलाह देना बहुत आसान है, मगर ख़ुद उसपर अमल करना बहुत मुश्किल होता है।
जरा सोचकर देखिए कि आपके अपने ही जीवन में, परिवार में, समाज में यदि किसी रिश्तेदार/पड़ोसी से हमारी लड़ाई हो जाती है, तो हम कभी उसकी मुंह देखना भी पसंद नहीं करते, भले ही उस लड़ाई में हमारा कोई बहुत बड़ा नुक़सान न हुआ है, फिर भी हमें वो अपना सबसे बड़ा दुश्मन नज़र आता है। यदि कोई हमें थप्पड़ मारता है, तो उसके जवाब में हम भी उसे थप्पड़ ही मारेंगे, गले लगाने नहीं जाएंगे, और यहां तो पड़ोसी मुल्क ने हर बार हमारा बहुत नुक़सान किया है, फिर भी हम उसके कलाकारों को अपनाएं और दोस्ती की बात करें, क्या ये अजीब नहीं लगता?
एक और अहम बात जो इन सब बहस के बीच कहीं दबकर रह गई है और वो है शहीद सैनिकों का परिवार, क्या किसी को उनकी चिंता है, क्या किसी को ज़रा भी एहसास है कि उनके बच्चों का भविष्य क्या होगा? कैसे वो आगे बढ़ेंगे? बेहतर होगा कि पाकिस्तानी कलाकारों की चिंता करने की बजाय हम शहीदों के परिवार वालों की बेहतरी के लिए कुछ सोचें और करें!


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